संदेश

बहुत बड़ा है यह संसार

थाल सजाकर किसे पूजने चले प्रात ही मतवाले?

पर्वत कहता शीश उठाकर, तुम भी ऊँचे बन जाओ।

गुरुस्तोत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला