संदेश

बहुत बड़ा है यह संसार

थाल सजाकर किसे पूजने चले प्रात ही मतवाले?

पर्वत कहता शीश उठाकर, तुम भी ऊँचे बन जाओ।

कविता- हम नन्हे मुन्ने हो चाहे पर नहीं किसी से कम