संदेश

पठामि संस्कृतं नित्यम्

बहुत बड़ा है यह संसार

थाल सजाकर किसे पूजने चले प्रात ही मतवाले?

पर्वत कहता शीश उठाकर, तुम भी ऊँचे बन जाओ।

गुरुस्तोत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला

चटका, चटका, रे चटका

सरससुबोधा विश्वमनोज्ञा

सोने का कौआ ( स्वर्णकाक: )

लक्ष्यमस्ति निश्चितं तथा विचारितं

भवतु भारतम्

कालिदासो जने जने

संस्कृत-प्रार्थना :- दयां कृत्वा हि विद्याया:

संस्कृत साहित्य परिचय

कारक के चिह्न (विभक्ति चिह्न)

Why Sanskrit?

संगणकम्

भारत के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल

गांव

खम ठोक ठेलता है जब नर,पर्वत के जाते पाँव उखड़ ||

शिवध्यानम्

दिनकर का जाति-प्रथा पर करारा प्रहार :- 'शरमाते हैं नहीं जगत् में जाति पूछने वाले'